प्रतिभा के बड़े-बड़े बूब्स


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प्रतिभा के बड़े-बड़े बूब्स

Antarvasna, hindi sex story: मेरी जॉब का पहला दिन था और मैं अपने ऑफिस में जब पहले दिन गया तो मेरी मुलाकात तरुण के साथ हुई और तरुण से मेरी काफी अच्छी दोस्ती होने लगी। तरुण और मैं काफी अच्छे दोस्त बन चुके थे और मेरा तरुण के घर पर आना जाना भी होने लगा था। एक रात हम दोनों पार्टी में थे उस दिन तरुण ने मुझे अपनी कजन प्रतिभा से मिलवाया। जब उसने मुझे अपनी कजन प्रतिभा से मिलवाया तो मुझे प्रतिभा अच्छी लगी और मैं उसे दिल ही दिल चाहने लगा था। मैं प्रतिभा को दिल ही दिल चाहने लगा था और मुझे वह काफी ज्यादा अच्छी लगने लगी थी यही वजह थी कि हम दोनों एक दूसरे से मिलना चाहते थे। मैंने प्रतिभा को मिलने का फैसला किया और मैंने तरुण से प्रतिभा का नंबर ले लिया था। मुझे प्रतिभा का नंबर मिल चुका था और मैं उससे बातें करने लगा था हम दोनों की बातें होने लगी थी और कहीं ना कहीं हम दोनों एक दूसरे को बहुत चाहने भी लगे थे। हम दोनों एक दूसरे को डेट करने लगे थे हम दोनों का रिलेशन अब अच्छे से चलने लगा था लेकिन मुझे नहीं पता था कि हमारे रिलेशन को किसी की नजर लग जाएगी और प्रतिभा मुझसे दूर हो जाएगी।

प्रतिभा मुझसे दूर हो चुकी थी और उसके घर वालों ने उसकी शादी कहीं और ही तय कर दी थी। तरुण को मेरे और प्रतिभा के बारे में अच्छे से मालूम था इसलिए उसने प्रतिभा के परिवार वालों को समझाने की कोशिश भी की थी लेकिन वह लोग बिल्कुल भी नहीं माने और प्रतिभा की शादी उन्होंने कहीं और ही तय करवा दी। मेरी जिंदगी में बहुत ही ज्यादा अकेलापन आ चुका था और मैं बहुत ज्यादा परेशान भी हो चुका था क्योंकि प्रतिभा के मेरी जिंदगी से चले जाने के बाद मैं पूरी तरीके से टूट चुका था। मैं अपने आप को संभाल भी नहीं पा रहा था लेकिन तरुण ने उस वक्त मेरा काफी साथ दिया यदि तरुण मेरा साथ नहीं देता तो शायद मैं अपनी जिंदगी में दोबारा से वापस कभी नहीं लौट पाता। मैं अब अपनी जिंदगी में वापस लौट चुका था और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुका था। मैंने मुंबई में रहने का फैसला कर लिया था और मैं भोपाल छोड़कर मुंबई आ चुका था मुंबई में ही मैं अब सेटल हो चुका था और मुंबई में मैं अपनी नई जिंदगी शुरू कर चुका था। अपने पीछे की जिंदगी को भूल कर मैं अब आगे बढ़ चुका था लेकिन कभी कबार मुझे प्रतिभा की याद आ जाती तो मैं प्रतिभा को बहुत ही ज्यादा मिस करता।

समय के साथ सब कुछ बदलता जा रहा था और मेरी जिंदगी में अब काफी कुछ चीजें बदलने लगी थी। मैं जिस कंपनी में जॉब करता था वहां पर मुझे प्रमोशन भी मिल चुका था और मैं एक अच्छे पद पर था सब कुछ मेरी जिंदगी में अच्छी तरीके से चलने लगा था। मैं चाहता था कि पापा और मम्मी को भी मैं अपने साथ ही मुंबई बुला लूं लेकिन वह लोग मेरे साथ मुंबई में रहने को तैयार नही थे इसलिए मैं उन्हें अपने साथ हमेशा के लिए मुंबई तो नहीं बुला पाया लेकिन उन्हें मैंने कुछ दिनों के लिए अपने पास मुंबई बुला लिया था जिससे कि मुझे भी अच्छा लग रहा था की वह लोग मेरे पास कुछ दिनों के लिए ही सही  लेकिन रहने के लिए तो आ गए है। वह लोग कुछ दिनों तक मेरे साथ रहे और फिर वह लोग वापस लौट गए। जब वह लोग भोपाल लौट गए तो मुझे कुछ दिनों तक तो बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा था। एक दिन मैं अपने ऑफिस से वापस लौट रहा था जब मैं अपने ऑफिस से वापस लौट रहा था तो मुझे एक दिन प्रतिभा दिखी। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मुझे प्रतिभा दिख जाएगी लेकिन उस दिन मुझे प्रतिभा दिखी तो मैंने प्रतिभा से बात करने की कोशिश की और प्रतिभा ने भी मुझसे बात की। प्रतिभा मुझसे मिलकर बड़ी खुश थी मैंने प्रतिभा से कहा कि तुम क्या मुंबई में ही रहने लगी हो तो वह मुझे कहने लगी कि मेरे पति का मुंबई में ट्रांसफर हो गया है और हम लोग मुंबई में ही रहते हैं। हालांकि प्रतिभा और मेरी जिंदगी में अब ऐसा कुछ भी नहीं था लेकिन फिर भी मैं प्रतिभा के साथ अपनी दोस्ती को आगे बढ़ाना चाहता था।

हम दोनों के बीच कुछ भी नहीं था लेकिन मैंने उस दिन प्रतिभा से उसका नंबर ले लिया और फिर वह वहां से चली गई। हम लोगों की बातें ज्यादा देर तक तो नहीं हुई थी लेकिन मुझे उस दिन प्रतिभा से बात करके बहुत ही अच्छा लगा था और हम दोनों बहुत खुश थे। उसके बाद भी कभी कबार मैं प्रतिभा से फोन पर बातें कर लिया करता था क्योंकि मैं ज्यादातर अपने काम के सिलसिले में मुंबई से बाहर ही रहता था इसलिए मेरी बात प्रतिभा से तो कम ही हो पाती थी। प्रतिभा अपनी शादीशुदा जिंदगी से बहुत ही ज्यादा खुश है और वह मुझे अपने पति के बारे में भी बताती रहती है मैंने भी प्रतिभा की जिंदगी में कभी झांकने की कोशिश नहीं की। मुझे भी इस बात की खुशी है कि प्रतिभा के पति उसका ध्यान रखते हैं और वह अपने पति के साथ बहुत ही खुश है। मैं और प्रतिभा अभी भी अच्छे दोस्त हैं और हम दोनों जब भी मिलते तो हमे बहुत ही अच्छा लगता है। एक दिन मैंने प्रतिभा को कहा कि तुम अपने पति को कभी मुझसे मिलवाना तो प्रतिभा ने कहा कि हां क्यों नहीं मैं तुम्हें अपने पति से जरूर मिलवाऊंगी। एक दिन प्रतिभा ने मुझे अपने घर पर डिनर के लिए इनवाइट किया। मुझे प्रतिभा ने जब अपने घर पर डिनर के लिए इनवाइट किया तो प्रतिभा के पति से मेरी उस वक्त पहली बार ही मुलाकात हुई थी और मुझे प्रतिभा के पति से मिलकर काफी अच्छा लगा।

उन लोगों के साथ में मैंने काफी अच्छा समय बिताया उसके बाद भी प्रतिभा और मैं एक दूसरे से बात करते तो हम दोनों को ही अच्छा लगता। जब भी मैं प्रतिभा के साथ फोन पर बातें करता या उससे मिलता तो मुझे काफी ज्यादा अच्छा लगता था। प्रतिभा और मैं बहुत ही ज्यादा खुश थे। हम दोनों एक दूसरे से मिलते थे एक दिन प्रतिभा के पति अपने काम से कहीं बाहर गए हुए थे। उस दिन प्रतिभा ने मुझे घर पर बुलाया हम दोनों साथ में बैठकर चाय पी रहे थे। हम दोनो एक दूसरे से बातें कर रहे थे लेकिन मुझे नहीं मालूम था उस दिन प्रतिभा और मेरे बीच मे वह सब कुछ हो जाएगा जो हम लोगों ने सोचा भी नहीं था। मौसम काफी ज्यादा सुहाना था उस दिन काफी ज्यादा ठंड भी हो रही थी मुंबई में कड़ाके की ठंड थी और प्रतिभा मेरे बगल में बैठी हुई थी।

मैंने अपने लंड को प्रतिभा के सामने किया तो प्रतिभा ने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया और मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा है। वह मेरे लंड को बहुत देर तक अपने मुंह में लेकर उसे चूसती रही। जब वह अपने मुंह में मेरे लंड को ले रही थी तो मेरे लंड से पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा था। मैंने प्रतिभा से कहा मेरे लंड से पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा है मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। हम दोनों बहुत ही ज्यादा खुश थे अब हम दोनों की गर्मी बहुत ज्यादा बढने लगी थी। मेरी गर्मी बढ़ती ही जा रही थी वह बहुत ही ज्यादा खुश थी जिस तरीके से हम दोनो एक दूसरे की गर्मी को बढ़ाए जा रहे थे। मैंने और प्रतिभा ने एक दूसरे को इतना ज्यादा गर्म कर दिया था मैंने प्रतिभा के कपड़े उतार कर उसके स्तनों के बीच में अपने लंड को रगड़ना शुरू किया उसे मज़ा आने लगा। प्रतिभा की दो पहांड जैसे स्तनों के बीच में मेरा लंड था और मैं अपने लंड को प्रतिभा के स्तनों के ऊपर नीचे कर रहा था। जब मैंने प्रतिभा के स्तनों को अपने मुंह के अंदर लिया तो उसे मज़ा आने लगा वह बहुत ज्यादा गर्म होने लगी थी। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था उसको भी बहुत ही ज्यादा मज़ा आने लगा था और मुझे भी बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था। प्रतिभा अपने आपको बिल्कुल भी नहीं हो पा रही थी उसने मुझे कहा मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रही हूं।

प्रतिभा की चूत से पानी बाहर की तरफ को निकल रहा था और मैंने उसकी चूत को कुछ देर तक चाटा जिससे कि उसे मज़ा आने लगा और वह मेरे बालों को अपने हाथों से खींचने लगी थी। मैंने काफी देर तक उसकी योनि का मजा लिया फिर अपने लंड को उसकी योनि में घुसा कर अंदर की तरफ से डाल दिया। मेरा लंड उसकी योनि के अंदर जा चुका था उसकी चूत के अंदर से पानी निकल रहा था। जब उसकी योनि से पानी बाहर निकलता तो मुझे बड़ा ही अच्छा लग रहा था हम दोनों पूरी तरीके से गर्म होते जा रहे थे हमारी गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी। मैंने प्रतिभा की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को काफी देर तक किया जब मैं प्रतिभा की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करता तो वह मुझे कहती मुझे और भी तेजी से चोदता जाओ।

मैं उसे तेजी से चोदता जा रहा था। हम दोनों बहुत ही ज्यादा गरम हो चुके थे एक समय ऐसा आया जब मेरा वीर्य बाहर की तरफ को निकलने को था मैंने प्रतिभा से कहा तुम अपनी चूतड़ों को मेरी तरफ कर लो। प्रतिभा ने अपनी चूतड़ों को मेरी तरफ किया मैंने उसकी योनि में अपने लंड को घुसा दिया मेरा लंड उसकी योनि में जा चुका था। मेरा लंड प्रतिभा की योनि के अंदर बाहर हो रहा था मैं बड़ी तेजी से उसे धक्के मार रहा था और वह मेरा साथ अच्छे से दे रही थी। जब मैं उसे धक्के मारता तो मुझे मजा आता और प्रतिभा को भी बड़ा मजा आ रहा था जिस तरीके से वह मेरा साथ दे रही थी। हम दोनों ने एक दूसरे का साथ काफी अच्छे से हमने एक दूसरे का साथ दिया। हमने सुहागरात को यादगार बना कर रख दिया था।

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