दरार को तिरछी नज़र से देखा-2


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Hindi sex stories: फिर जब वो दो दिन के बाद काम पर आई तो वो बहुत खुश लग रही थी और में जब शाम को घर आया तो मैंने उससे पूछा कि क्यों मिल आई क्या अपने पति से.. कैसे है वो? कितने कमा कर लाया था और क्या क्या किया तुम लोगों ने। तो वो कहने लगी कि साहब मेरे वो तो बहुत अच्छे है वो बहुत सारे पैसे लाए थे और हमने बहुत मज़े भी किये और बात करते करते में हमेशा उसके बूब्स देखता और उसकी गांड देखता.. वो मुझे कई बार देख लेती और फिर वहाँ से जाने लगती और ऐसे ही बातों का सिलसिला चलता रहा। फिर एक दिन मैंने उससे ऐसे ही कहा कि तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो और अगर तुम्हारी शादी नहीं हुई होती तो में तुमसे शादी कर लेता। तो वो कुछ नहीं बोली.. मैंने धीरे से अपना हाथ उसके हाथ पर रख दिया और उससे कहा कि मेरे पास आकर बैठो.. लेकिन उसने मना कर दिया और बोली कि साहब में अभी चलती हूँ। तो मैंने उससे कहा कि तुम जा रही हो तो चली जाओ.. लेकिन ज़रा सोचकर बताना।

फिर शाम को जब वो आई तो उसने घर का काम किया और चली गई.. मुझे ऐसा लगा कि वो शायद नाराज़ हो गई है तो उसके लिए एक सिंपल सी साड़ी लेकर आया और जब वो दूसरे दिन आई तो मैंने उससे चाय लेते समय उसको वो साड़ी दे दी और मैंने उससे कहा कि तुम मुझे ग़लत मत समझो शांती.. तुम मुझे सच में बहुत अच्छी लगती हो और में तुम्हे बहुत पसंद करता हूँ। तो वो शरमाते हुए चली गई और किचन में जाकर खाना बनाने लग गई। फिर मैंने 3 दिन बाद ऑफिस से 2 दिन की छुट्टी लेने का फ़ैसला किया और मैंने सोच लिया कि इसको इन्ही 3 दिन में सेट करना पड़ेगा.. लेकिन 2 दिन चोदना है और जब वो दूसरे दिन आई.. तो मैंने उससे कहा कि सुनो शांती तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो और में तुमको बहुत सारा प्यार देना चाहता हूँ.. मैंने तुमको जब से देखा है में पागल सा हो गया हूँ और मेरा दिल चाहता है कि में तुमको दिन रात प्यार करता रहूँ। तभी वो यह बात सुनकर नाराज़ सी हो गई और वो कहने लगी कि साहब मैंने यह कभी नहीं सोचा था कि आप मेरे बारे में ऐसा सोचते होंगे.. में जा रही हूँ और अब कभी नहीं आउंगी और आप सब मर्द एक जैसे होते है। फिर मैंने उससे कहा कि शांति तुम ग़लत समझ रही हो में तुमको बहुत खुश रखूँगा और तुम मेरा साथ दो तो में तुमको इतने पैसे दूँगा कि तुमको कहीं और काम भी करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.. लेकिन वो बिल्कुल भी मानने को तैयार ही नहीं थी। फिर मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसको अपनी और खींचने लगा और वो मुझसे दूर जाने की नाकाम कोशिश करती रही। फिर मैंने उसको ज़ोर से पकड़कर अपनी गोद में बैठा लिया और मैंने उससे कहा कि तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो शांति.. प्लीज़ समझो मेरी बात को। मेरा कोई ग़लत इरादा नहीं है प्लीज़.. शांती और उसको ज़बरदस्ती पकड़कर दबाने लगा। फिर मैंने उसके बूब्स को दबाना शुरू कर दिया और उसकी साड़ी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा। तभी इतने में ही शांती बोली कि साहब में आपसे एक ही शर्त पर सब कुछ करने को तैयार हो जाउंगी। तो मैंने पूछा कि कौन सी शर्त? तो वो बोली कि आप मुझ पर कभी कोई भी ज़बरदस्ती नहीं करेंगे और कभी किसी से कहेंगे नहीं तो.. फिर मैंने कहा कि में पागल हूँ क्या.. जो किसी से कहूँगा कि मैंने तुम्हारे साथ कुछ किया है? तो वो बोली कि फिर ठीक है और फिर वो धीरे से बोली कि साहब प्यासी तो में भी बहुत समय से हूँ और मेरी भी आपके ऊपर पिछले 3-4 महीने से नज़र है.. लेकिन मेरी हिम्मत नहीं होती थी कि में आपसे कैसे कहूँ? और आज आपने ही कह दिया है तो मेरी भी परेशानी खत्म हो गई है। शांति आज का काम पूरा कर चुकी थी और मेरा भी ऑफिस जाने का टाईम हो चुका था तो में भी तैयार हो गया और मैंने उससे कहा कि आज शाम को मिलना। तो वो बोली कि ठीक है साहब और वहाँ से चली गई। फिर में भी तैयार हो गया और जब शाम को वो आई.. तो मैंने उसे अपने साथ बैठाकर दोनों दिन की बात की मैंने उससे कहा कि तुम दो दिन के लिए मेरे ही घर पर रुक जाओ ताकि हम अच्छे से काम कर सके। तो उसने बहुत देर नाटक करने के बाद बोली कि ठीक है साहब और फिर मैंने अपना हाथ उसके बूब्स पर रख दिया और उसके बूब्स को दबाने लग गया और वो मेरा हाथ छुड़ाने लगी.. लेकिन में करीब 2-3 मिनट तक उसके बूब्स दबाता रहा।

फिर मैंने उससे कहा कि में आज तुमको कपड़े दिलवाने चलता हूँ तो वो बहुत खुश हो गई। मैंने उससे कहा कि तुम अच्छे से मेरे घर पर नहा लो और तब तक मैंने उसके लिए एक हरी साड़ी निकाल ली जो मैंने भाभी को दिलाई थी उनको चोदने के लिए और फिर जब वो बाहर आई.. तब मैंने उसको वो साड़ी पहनने को दी और वो वहां पर सिर्फ़ ब्रा पेंटी में बाहर आई थी और जैसे ही वो बाहर आई.. तो मैंने उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके बूब्स दबा दिए और उसकी पेंटी के ऊपर से उसकी चूत को दबाने लग गया। फिर मैंने उसकी ब्रा को खोल दिया और उसके बूब्स को चूसने लगा वो भी एकदम मदहोश हो गई और फिर बोली कि साहब अभी रहने दो मुझे आज घर भी जाना है और पता नहीं आप खरीदारी में कितनी देर लगाओगे है? तो मैंने कहा कि ठीक है। फिर हम लोग मेरे घर से साथ में निकले और मैंने एक ऑटो किया और हम दोनों लेडीस मार्केट में गए.. मैंने वहां पर उसको न्यू ब्रा पेंटी, मेक्सी और साड़ी के दो दो सेट दिला दिए और फिर वहीं पर बाहर से मैंने उसको शेम्पू और टूथब्रश और पेस्ट भी दिला दिया और फिर मैंने उससे कहा कि चलो अब तुम अपने घर पर चली जाओ और में भी वो सब सामान लेकर अपने घर पर आ गया और मैंने रास्ते में एक मेडिकल पर रुककर केप्सूल और कन्डोम ले लिया।

फिर दो दिन बाद जब वो आई.. तो मैंने उससे पूछा कि क्यों घर पर बताकर आई हो ना? तो उसने कहा कि हाँ में बताकर आई हूँ और फिर मैंने उसको घर के अंदर बुला लिया और घर का दरवाज़ा बंद कर दिया.. वो मेरे घर पर 2 दिन और 3 रातों के लिए आई थी। मेरा मतलब है वो शाम को जब मेरे घर पर आई तो तब से ही वो मेरे घर पर अगले 2 दिन के लिए रुकने वाली थी। तो वो जैसे ही अंदर आई.. मैंने उससे कहा कि शांति में नहाने जा रहा हूँ.. तुम जब तक टी.वी देखो और फिर में नहाने चला गया। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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