लंड की तलाश मे

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hindi sex kahani मैं आज एक नयी कहानी लेकर आई हूँ और मुझे सेक्स बहुत पसंद है। चुदाई का मतलब समझने की उम्र से ही लंड की तलाश मे थी जो कि जल्दी ही अपने घर मे ही मिल गया था। मेरी पहली चुदाई मेरे मामा ने ही की थी। हम एक दूसरे को बहुत चाहते थे और खूब चुदाई करते थे पर मैं अपनी चूत की खुजली किसी और के लंड से भी मिटा लेती थी।

मैने घर से बाहर ही पढ़ाई की और नौकरी भी बाहर ही ढूंढी ताकि जवानी का पूरा फायदा उठा संकू मुझे नौकरी करते साल भर हो गया था। ऑफीस मे मैं किसी को घास नही डालती थी और पक्की प्रोफेशनल थी पर बाहर हर छुट्टी पर नया लंड लेती थी। मैं और मेरी एक सहेली फ्लेट मे रहती थी उसका एक बॉयफ्रेंड था जिसके साथ वो रोज़ चुदाई का खेल खेलती थी। वो मेरी सहेली को चोद के रात मे ही चला जाता था। मैं तो उसके कमरे से आती आवाज़े सुन के अपनी उंगली से काम चलाती थी।

रोज़ चुदने वाली मैं अब काम ज़्यादा होने के कारण सिर्फ़ छुट्टी पर ही चुदवा पाती थी मेरे कज़न मामाजी काम के सिलसिले मे अक्सर मेरे शहर में आते थे मेरे पास ही रुकते थे उनसे मिल के मेरा दिल बहुत खुश हो जाता था और चूत की लॉटरी निकल जाती थी। वो इतने प्यार से चोदते थे कि मेरा मन ही नही होता था चूत में से उनका लंड निकालने का और ये बात वो भी जानते थे और कई बार वो चुदाई के बाद भी चूत मे लंड डाले ही सो जाते थे चाहे जितने लंड ले लूँ उनके लंड का कोई मुकाबला नही था।

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खैर मेरी किस्मत कहाँ कि रोज़ उनसे चुदवा सकूँ। मेरा एक क्लाइंट मुझ पर कई दिनो से लाइन मार रहा था मैं भी उसके सामने खूब इतराती लेकिन उसे घास नही डालती करीब 2-3 महीने यही खेल चला वो बात करते वक़्त मेरी चूचियो को देख के मुस्कुरा देता जिसका जवाब अब मैं भी मुस्कुरा के देती थी धीरे धीरे हमारी बाते लम्बी होने लगी और वो देखने से आगे बड़ चुका था मेरे काम से खुश होने के कारण मेरा बॉस कभी कुछ कहता नही था मेरे केबिन मे मीटिंग के दौरान कोई नही आ सकता था इस बात से उसे खुली छुट मिली हुई थी।

हमारी बाते अब कुर्सी मेज़ पर नही बल्कि सोफे पर होने लगी वो मेरे कंधे पर हाथ रखके बैठता और बीच बीच मे चूचिया छू लेता मैं भी बातो बातो मे हाथ फिसलने के नाटक करके उसके लंड को छू लेती एक नया प्रॉजेक्ट उसने मेरे साथ समय गुजारने के लिये शुरू किया हम घंटो बात करते एक दूसरे को छूते अब धीरे धीरे उसकी हिम्मत बड़ गयी थी वो मेरी चूचियो को जी भर के दबाता था मैं भी उसके लंड को पेन्ट के उपर से खूब मसलती हम दोनो ही आगे बढ़ना चाहते थे एक छुट्टी पर उसने पूछा की क्या हम शनिवार को मीटिंग कर सकते हैं मैने पूछा इतना ज़रूरी कोई काम तो है नही फिर क्यो? तो वो बोला की शनिवार को कोई डिस्टर्ब करने वाला नही होगा इसलिये मैं मान गयी वो शुक्रवार को मुझे घर छोड़ने आया।

मैने उसे उपर कॉफी के लिये बुला लिया। अब आप सब कॉफी का मतलब तो जानते ही होंगे उपर आते ही मैं उसे मेरे कमरे मे ले गयी वो तो मुझे बेड पर गिरा के मुझ पर टूट पड़ा कई दिन से चुदी ना होने के कारण मुझे बहुत मज़ा आ रहा था उसने मुझे पूरा नंगा कर दिया और जी भर के मेरी चूचि और चूत को चूमा फिर अपनी पेन्ट खोल के अपना लंड मेरी गीली चूत मे डाल दिया। थोड़ी देर मेरी चूत मारने के बाद हम दोनो झड़ गये। उसने मुझे चूमते हुये कहा क्या करू डार्लिंग कंट्रोल नही हुआ कल तुम्हे पूरा मज़ा दूंगा और दोपहर को आने का कह कर चला गया, क्योकि शनिवार रात को उसे शहर से बाहर जाना था और मैंने लंच की पूरी तैयारी कर ली थी। मेरी सहेली शनिवार को भी काम करती है इसलिये कोई डिस्टर्ब करने वाला नहीं था हमें वो आया साथ मे शराब की एक बोतल भी लाया था आते की चूमने लगा चूमते हुये हमने एक दूसरे के अंगो को खूब दबाया और मसला।

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वो मेरी चूचियो को दबा दबा के और कड़क कर रहा था और मेरी चूत को भी सहला रहा था मैं भी उसके औज़ार को खड़ा करने मे लगी थी थोड़ी देर बाद हमने दो दो पेक लिये फिर थोड़ा सा खाना खाया मुझे तो चढ़ चुकी थी। ये वो जनता था उसने वही मेरे कपड़े खोल दिये मैं भी नंगी उसकी गोद मे बैठ के अपनी चूचिया चुसवा रही थी वो अपनी नंगी चूत उसके लंड पर रग़ड रही थी उसका लंड भी पेन्ट फाड़ने को तैयार था मैं उसे बेड पर ले आई नीचे बैठ के मैने सबसे पहले उसकी पेन्ट खोली और चड्डी के उपर से ही लंड पर टूट पड़ी खूब चाटा चूसा और आंड से खेली फिर मैने उसकी चड्डी खोल दी उसके 7 इंच का लंड मेरे सामने तन रहा था तो मैने फट से उसे मुँह मे भर लिया खूब चूसा अपने हाथो से उसके अंडो को सहला रही थी मैं उसके टोपे को कस के चूस रही थी उसके मुँह से सिसकारियां आने लगी।

मैने उसका लंड अपने गले के अंदर तक उतार लिया वो तो सातवे आसमान मे था वो मेरे मुँह मे चोदने लगा लंड चूसने के बाद उसने मुझे बेड पर लेटाया और 69 पोजीशन मे आकर मेरी चूत अपने मुँह मे भर ली क्या ग़ज़ब का जादू था उसकी जुबान में, मैं तो जैसे उड़ रही थी वो मेरी चूत अपनी जीभ से चोद रहा था और मेरे दाने को मसल रहा था मैं गांड उचका उचका के मज़े ले रही थी मैने उसे सीधा लेटाया और उसके लंड पर चढ़ गयी बिना कुछ सुने ही लंड अपनी चूत मे डाल के उचक उचक के उससे चुदवाने लगी। वो मेरी हिलती उई चूचिया मसल रहा था थोड़ी देर बाद मैं झड़ने वाली थी तो मैने उसका लंड निकाल दिया इतनी जल्दी ये खेल ख़त्म नही करना था। मुझे मैं बेड पर घुटने और हाथ टीका के खड़ी हो गयी उसने मेरी चूत मे पीछे से लंड डाल दिया।

वो मेरी गांड मे एक उंगली से रास्ता बना रहा था थोड़ी देर चोदने के बाद उसने मेरी चूत का पानी मेरी गांड के अंदर लगाया और अपना लंड धीरे से अंदर डाला वो बहुत अनुभव वाला था, इसलिये बड़े प्यार से मेरी गांड मार रहा था। वो वैसे ही मेरे उपर झुक गया और मेरी चूचि दबाने लगा उसने कहा मैं झड़ने वाला हूँ तो मैं सीधी हो गयी उसने मेरी चूत मे लंड डाल के ज़ोर ज़ोर से पेलना शुरू किया। मैं भी हिल हिल के चुदवा रही थी उसने ऐसे चुदाई की मैं दुबारा झड़ गयी वो भी 5-6 झटके और लगा के झड़ गया हम दोनो थक कर ऐसे ही लेटे रहे।

थोड़ी देर बाद वो फ्रेश होकर जाने लगा जाने से पहले उसने मुझे एक सोने की रिंग दी जो वो लेकर आया था मैने जवाब मे उसे खूब चूमा वो सोमवार मिलने का बोल कर चला गया। मैं टीवी देखने लगी उसकी लाई हुई शराब बची थी, मैं एक बड़ा सा पेक बना कर टीवी के सामने बैठ कर पीने लगी और तभी मेरी सहेली का कॉल आया उसने कहा की वो बाहर जा रही है और सोमवार सुबह ही वापस आयेगी उसके बॉयफ्रेंड का फोन नहीं लग रहा था तो उसने मुझसे कहा कि मैं उसे भी बता दूँ उसका बॉयफ्रेंड राज रोज़ ही रात को आता था मै नशे मे और गर्म हो रही थी में सहेली के रूम मे ही चली गयी वहाँ कुछ सीडी रखी थी और देखा तो मज़ेदार ब्लू फिल्म थी एक मे कई लड़के लड़कियां साथ मे चुदाई कर रहे थे एक पार्टी मे तो दूसरे मे दो लड़कियां एक आदमी से चुदवा रही थी, एक उसके मुँह पर अपनी चूत रख के जीभ से चुद रही थी तो दूसरी उसके घोड़े जैसे लंड को गांड मे डाल के चुद रही थी।

मैं इतनी गर्म हो गयी थी की वहीं पर अपनी जींस खोल के अपनी चूत रगड़ने लगी अगली फिल्म मुझे सबसे ज़्यादा पसंद आई उसमे तीन पहलवान जेसे मर्द एक लड़की को चोद रहे थे एक लड़का सोफे पर बैठा था जिसके लंड पर लड़की चढ़ के चुदवा रही थी और अपनी चूचि चुसवा रही थी दूसरे ने पीछे से गांड पेल दी।। आह क्या मज़ा आ रहा होगा उसे तीसरे ने सोफे के पीछे से खड़े होकर अपना लंड उसके मुँह मे दे रखा था मैं वहीं बेड पर अपनी चूत को उंगली से शांत करने लगी पता ही नही चला कब आँख लग गयी अपने शरीर पर किसी के हाथ महसूस हुये तो आँख खुली ये राज था रात हो चुकी थी वो अपनी चाबी से अंदर आ गया था और अंधेरे मे मुझे मेरी सहेली समझ के बेड पर लेट गया था। टीवी पर भी ब्लू फिल्म चल रही थी और मेरे कानो मे कहने लगा जान आज अकेले ही शुरू हो गयी। मेरा इंतज़ार नही हुआ और उसने मेरी चूचियां दबानी शुरू कर दी।

मैं तो बस मज़े ले रही थी मेरी चूचियां बहुत बड़ी है जबकि मेरी सहेली की बहुत छोटी है उन्हे पकड़ते ही वो समझ गया की बात कुछ और है उसने मुझे पलटा कर देखा औए फिर उठने लगा मैने उसे खीचते हुये कहा डरते क्यो हो? मैं क्या इतनी बुरी हूँ जो शुरू किया है वो ख़त्म तो करो, वो कहने लगा की रचना ने देख लिया तो मैने कहा अरे मेरे राजा वो तो अब सोमवार को ही आयेगी आज तुम्हे वो मज़ा दूँगी जो तुम्हे रचना ने नहीं दिया होगा और में उसे चूमने लगी।

वो भी गर्म था उसका लंड ज़्यादा लंबा नही था पर बहुत मोटा था मैने उसे चूसना शुरू कर दिया वो पूरे मुँह मे नही जा रहा था तो मैने अपने हाथ से उसे उपर नीचे करना शुरू किया और टोपे को ज़ोर से चूसने लगी वो मज़े से आवाज़े करने लगा और कहने लगा रचना ने आज तक मेरा लंड नही चूसा क्या बड़िया चूसते हो तुम मैने लंड को मुँह से निकाल के कहा मेरे राजा मैं तो तुम्हे जाने ही ना दूँ क्या लंड पाया है मैं और कस के चूसने लगी मैने उसे बैठाया और उसके लंड पर चढ़ गयी। अब मेरी चूचि उसके मुँह के ठीक सामने थी जिसे वो चूसे और ज़ोर से दबाये जा रहा था कहने लगा एक रात को तुम्हे सोफे पर सोते देखा था तब से तुम्हारी चूचियो को छुना चाहता था कई बार तुम्हे सोच के रचना को चोदा है। मैने कहा जब मन हो तब चोद लेना मैने कब मना किया है मुझे नीचे लेटा के उसने मेरी चूत में अपना लंड डालना शुरू किया और लंड मोटा होने के कारण मुझे दुगना मज़ा आ रहा था और वो ज़ोर के झटके दे रहा था।

अचानक उसने स्पीड बड़ा दी और मेरी चूत मे ही झड़ गया जब उसने अपना लंड निकाला तो ढेर सारा माल मेरी चूत से निकलने लगा मैने कहा मेरी भट्टी का क्या तो उसने मेरे होंठ चूसते हुये मेरी चूत मे उंगली डाल के चोदना शुरू किया उसने अपनी दो उंगलियो से चोद चोद के मुझे झड़ा ही दिया वो उस रात वहीँ रुका और हमने पूरे घर मे जगह बदल बदल के हर तरीके से चुदाई की अब तो वो रचना के ना होने पर या उसके आने से पहले मुझे चोदता ज़रूर था ।।


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