रूपम की पत्नी की चुदाई-1

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hindi sex kahani हैल्लो दोस्तों, में शिवम आप सभी को अपने जीवन का एक सच बताने आप सभी के सामने प्रस्तुत हुआ हूँ और मुझे उम्मीद है कि यह सभी पढ़ने वालों को जरुर पसंद आएगी। दोस्तों निशा मेरे छोटे भाई रूपम की पत्नी है, निशा बहुत सुंदर महिला है और देखकर मुझे लगता है कि उसका बदन भगवान ने बड़ी तसल्ली से ध्यान से तराश कर बनाया है। दोस्तों में शिवम उसका जेठ हूँ, मेरी शादी को पूरे दस साल हो चुके है, निशा शुरू से ही मुझे बड़ी अच्छी लगती थी और वो मुझसे बहुत खुली हुई थी। दोस्तों रूपम अमेरिका की एक बहुत बड़ी प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है। दोस्तों में आप सभी को बताना तो भूल ही गया कि निशा का मयका नागपुर में है और हम सभी जालंधर से है और यह घटना आज से करीब पांच साल पहले की बात है, हुआ यह कि शादी के एक साल बाद ही निशा गर्भवती हो गयी। अब अपनी डिलीवरी के लिए वो अपने मयके गई हुई थी, वहां पर सात महीने में ही उसकी डिलीवरी हो गयी और उसका वो बच्चा शुरू से ही बड़ा कमजोर था। फिर दो सप्ताह के बाद ही उस बच्चे की मौत हो गयी, रूपम तुरंत छुट्टी लेकर नागपुर चला गया और फिर कुछ दिन वहाँ रहकर वो वापस आ गया, वो वापस अकेला ही आया था। अब उन दोनों में यह तय हुआ था कि निशा की हालत थोड़ी ठीक होने के बाद वापस आ जाएगी।

फिर एक महीने के बाद जब निशा को वापस लाने की बात आई, तब रूपम को छुट्टी नहीं मिली और फिर रूपम ने मुझसे निशा को लेने जाने के लिए कहा। अब में निशा को लेने ट्रेन से निकल गया, वैसे मैंने निशा को कभी गलत नजरों से नहीं देखा था, लेकिन उस सफर में हम दोनों में कुछ ऐसा हो गया कि मेरे सामने हमेशा घूँघट में घूमने वाली निशा अब बिल्कुल बेपर्दा हो गयी थी। दोस्तों हमारी टिकट Ist क्लास में बुक थी, अब चाट सीट की बर्थ में दो सीट पर कोई नहीं आया था, जब ऑफ-सीज़न था और इसलिए वो ट्रेन रास्ते में भी नहीं भरी थी। अब हम दोनों ट्रेन में चढ़ गये, जब गर्मियों के दिन थे। फिर जब तक ट्रेन स्टेशन से नहीं निकली तब तक वो मेरे सामने घूँघट में खड़ी थी, लेकिन दूसरों की आँखों से ओझल होते ही उसने अपना घूँघट उलट दिया और कहा कि अब आप चाहे कुछ भी समझें, में अकेले में आपसे घूँघट नहीं करूँगी, मुझे आप अच्छे लगते हो और आपके सामने तो में ऐसी ही रहूंगी। फिर में उसकी वो बात सुनकर ज़ोर से हंस पड़ा, क्योंकि में भी शुरू से घूँघट के समर्थन में कभी नहीं रहा था, मैंने पहली बार उसके बेपर्दा चेहरे को देखा था।

अब में उसके सुंदर चेहरे को देखता ही रह गया था, तभी अचानक से मेरे मुँह से निकल गया। अब घूँघट के पीछे इतना लाजवाब हुस्न छुपा है उसका पता कैसे लगता? फिर उसने मेरी तरफ देखा और फिर वो शरम से लाल हो गयी, उसने हरे रंग की एक शिफान की साड़ी पहनी हुई थी और उसने ब्लाउज भी मैचिंग का पहना था। अब तेज गरमी की वजह से बात करते हुए उसकी साड़ी का आँचल उसके ब्लाउज के ऊपर से सरक गया था। फिर उस समय मैंने जाना कि उसने ब्लाउज के अंदर ब्रा नहीं पहनी है, उसके स्तन दूध से भरे हुए थे और इसलिए वो बहुत बड़े-बड़े हो गये थे और उसके ब्लाउज का ऊपर का एक हुक टूटा हुआ था, इसलिए उसकी आधे बूब्स मुझे साफ-साफ दिख रहे थे। अब उसके पतले ब्लाउज से उसकी ब्रा नहीं होने की वजह से उसकी निप्पल और उसके चारों तरफ का काला घेरा मुझे साफ-साफ नजर आ रहा था। अब मेरी नजर जैसे उसकी छाती से चिपक गयी थी में उसके बूब्स को लगातार घूरकर देखे जा रहा था। फिर उसने बात करते-करते मेरी तरफ देखा और मेरी नजरों का अपनी नजरों से पीछा किया और मुझे अपने बाहर झलकते हुए बूब्स को देखता पाकर शरमा गयी और जल्दी से अपनी छाती को अपने आँचल से ढक लिया।

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अब हम दोनों बातें करते हुए जा रहे थे, कुछ देर के बाद वो उठकर बाथरूम में चली गयी और कुछ देर के बाद वापस लौटकर आ गई बत मैंने देखा कि उसका चेहरा थोड़ा गंभीर था। अब हम वापस में बातें करने लगे थे, कुछ देर के बाद वो वापस से उठी और कुछ देर के बाद वापस से लौटकर आ गयी। फिर मैंने देखा कि वो बात करते-करते कसमसा रही है और अपने हाथों से अपने बूब्स को हल्के से दबा रही है। तभी मैंने उसको असमंजस में देखा और उसको पूछा क्या तुम्हे कोई परेशानी है? तब वो बोली कि नहीं-नहीं। फिर कुछ देर के बाद वो वापस से उठी, मैंने कहा कि तुम मुझे बताओ ना क्या परेशानी है? तब वो थोड़ा सा झिझकते हुए खड़ी रही और फिर बिना कुछ बोले बाहर चली गयी और फिर कुछ देर के बाद वापस आकर मेरे सामने बैठ गयी और बोली कि मेरी छाती में दर्द हो रहा है और उसने अपना चेहरा ऊपर उठाया। अब मैंने देखा कि उसकी आँखों से आँसू से निकल रहे थे, तभी मैंने पूछा कि क्यों? क्या हुआ? दोस्तों मर्द वैसे भी औरतों के मामले में थोड़े नासमझ होते है, तो मेरी भी समझ में कुछ नहीं आया था कि अचानक से उसको क्या हो गया है? तभी वो बोली कि जी वो क्या है? वो मेरे बूब्स भारी हो रहे है और अब वो समझ नहीं पा रही थी कि वो मुझे कैसे अपनी परेशानी को समझाए? आख़िर में उसका जेठ जो था।

तभी उसने अपनी नजरें नीचे करते हुए कहा कि मेरे बूब्स में दूध भर गया है, लेकिन निकल नहीं पा रहा है। फिर मैंने उसको पूछा कि बाथरूम जाना है क्या? तब वो बोली कि गयी थी, लेकिन वॉश बेसिन बहुत गंदा है इसलिए में वापस चली आई और बाहर के वॉश बेसिन में मुझे शरम आती है, कोई देख ले तो क्या सोचेगा? अब में सोचने लगा था कि फिर क्या किया जाए? और कुछ ऐसा करें जिससे तुम यही अपना यह दूध खाली कर सको, लेकिन किसमें खाली करोगी? नीचे फर्श पर गिरा नहीं सकती और यहाँ कोई बर्तन भी नहीं है जिसमें तुम अपना दूध निकाल सको। तभी उसने झिझकते हुए फिर से मेरी तरफ एक नजर डालकर अपनी नजरें झुका ली। फिर वो अपने पैर के नाखूनो को कुरेदती हुई बोली कि अगर आप गलत नहीं समझो तो में कुछ कहूँ? मैंने कहा कि बोलो। अब वो बोली कि आप इन्हें खाली कर दीजिए ना। तभी में हैरान होकर बोला कि में इन्हें कैसे खाली कर सकता हूँ? और फिर मैंने उसके बूब्स को निगाह भरकर देखा, वो बोली कि आप अगर इस दूध को पीलो और फिर उसने आगे कुछ नहीं कहा। अब में उसकी बातों से एकदम से चकित हो गया था, तभी मैंने उसको बोला कि लेकिन यह कैसे हो सकता है? तुम मेरे छोटे भाई की बीवी हो, में तुम्हारे बूब्स पर अपना मुँह कैसे लगा सकता हूँ?

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