हाय क्या बूब्स थे रूपा के-2

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hindi chudai ki kahani: मैं उसे भी छुपाने की कोशिश कर रहा था मेरा चेहरा पीला पड़ गया था डॉक्टर बोला शरमाओ मत भाई मैं उस दिन को कोश रहा जिस दिन मैने रूपा का नाम अपनी मेडिकल क्लेम पॉलिसी मैं डाला था नहीं तो आज ये दिन देखने की नौबत नहीं आती इधर आओं उसने कहा इसे सक करो मैने रुकते- रुकते अरे भाई शरमाओ मत चलो जैसे आप चूसने वाला आम खाते हो वैसे ही इसे भी दबा-दबा के आपको दूध सक करना है और उसने मुझे झुका के बूब्स सक करने को कहा मैने कांपते होठों से रूपा का बूब्स अपने मुहँ मैं लिया और नर्स ने जैसे ही दबाया उसमें से दूध की एक धार निकली मेरा दूध से मुहँ भर गया.

मैं थोड़ी देर मैं दबा– दबा कर दूध पीने लगा शायद इससे रूपा को कुछ आराम मिल रहा था मैने कोई 2-3 मिनिट तक उसका लेफ्ट बूब्स चूसा उसके बाद नर्स ने मुझे दूसरे बूब्स को चूसने को कहा इसे भी चूस लो जिससे इन्हें आराम मिलेगा डॉक्टर बोला मैं जा रहा हूँ आप थोड़ी देर इनका दूध निकाले जाये फिर में आपसे बात करूँगा फिर मैने रूपा को देखा जो अपनी आँखे बंद करके लेटी हुई थी शायद आनंद मैं या उसे आराम मिल रहा था फिर मैने बारी- बारी दोनो बूब्स को दबा-दबा के उनका दूध पिया मैने रूपा से पूछा अब ठीक है वो बोली हाँ ठीक है नर्स वहीं बैठी थी इसलिये हम ज़्यादा बात नहीं कर पाये डॉक्टर बोला भाई समझ लिया ना सारा प्रोसेस मैने हाँ मैं सर हिलाया.

अब आपको दिन मैं कम से कम 2 बार दूध सक करके पीना है और ये औरत का शुरुआत का दूध है ये बहुत फायेदेमंद भी होता है फिर वो थोड़ा हंसते हुये बोला भाई इसमें तुम्हे कोई प्रोब्लम भी नहीं होनी चाहिये बूब्स तो वैसे भी सक करते होगे अपनी पत्नी के क्यों भाभी जी उसने रुपा की तरफ देखते हुये कहा उसका शर्म से चेहरा लाल हो गया वैसे मैं मेडिसिन से भी दूध को सूखा सकता हूँ लेकिन उससे बाद मैं प्रोब्लम होगी इसलिये सजेस्ट यही करूँगा की सक करके इसे निकाल दे और केवल 4-5 महीने की ही तो बात है और दोस्त सच में तुम बहुत लकी हो तुम्हारी पत्नी बहुत सुन्दर है और उसके बूब्स भी यार वेरी लकी हम दोनो को बहुत शर्म आ रही थी डॉक्टर बोला और इनकी सेहत का ध्यान रखों ड्राइ फ्रूट फ्रूट जूस जितना ज़्यादा से ज़्यादा पीला सकते हो पीलाओ प्रेग्नेन्सी से शरीर मैं कमज़ोरी आ जाती है.

मैने कहा ठीक है और मैं वहाँ से बाहर आ गया हम दोनो के बीच एक खामोशी थी दोनो के होठ बिल्कुल चुप थे मैने बाइक स्टार्ट की और बिग बाज़ार पर रोक दी रूपा बोली क्या हुआ भैया मैने कहा डॉक्टर ने कहा था ना की तेरे को कमज़ोरी है कुछ फ्रूट & ड्राइ फ्रूट लेते हैं फिर हमने ढेर सारे फ्रूट ड्राइ फ्रूट लिये और एक मिक्स्चर ग्राइंडर भी लिया जूस के लिये सब समान ले कर हम घर आये मैने कहा अब मैं ऑफीस निकलता हूँ शाम को मिलते हैं पूरा दिन मेरे दिमाग मैं सुबह का घटना क्रम चलता रहा मैने आज तक रूपा को कभी ग़लत नज़र से नहीं देखा था लेकिन आज किस्मत ने क्या करवा दिया वो भी मुझसे जिसने 3 साल से औरत को हाथ भी नहीं लगाया हो क्या हालत होगी उस आदमी की लेकिन आज की घटना से मुझे लगा जैसे मेरी जिंदगी को कई मायने मिल गये हों.

मुझे इस समय हरिवंश राय बच्चन की कविता की एक पंक्ति याद आई नीड का निर्वाण फिर मुझे लगा जैसे भगवान मेरे को फिर से एक बार ज़िंदगी जीने का मौका दिया है और भगवान ने दिया है मौका तो करना भी मुझे पड़ेगा लेकिन मुझे ये नहीं पता था रूपा क्या सोच रही है मैने सोचा हम दोनो एक ही कश्ती मैं सवार है एक दूसरे का सहारा बने वेसे में आपसे एक बात कहूँ रूपा दिखने में बहुत सुन्दर थी और प्रेग्नेन्सी के बाद तो रूपा और भी ज्यादा सुन्दर लगने लगी थी और मेरे लिये तो वो एक परी के रूप मैं आई थी मैं घर पहुँचा शाम को कोई 7.30 का टाइम हो रहा था मैं टी.वी देखने लगा रूपा वहीं सोफे पर बेठ गयी हम एक दूसरे से आँखे चुरा रहे थे.

मैने रूपा को 5000 रुपये दिये और कहा मेरे पहले कभी दिमाग़ मैं ही नहीं आया प्लीज ये पैसे तुम रख लो कुछ ज़रूरत हो सकती है रूपा रोने लग गयी भैया आप मेरा इतना ख्याल रखते हैं मैंने कहा छोड़ ना इस मैं रोने की क्या बात है अब मेरा तेरे आलावा कौन है वो मेरे कंधे पर सर रख कर रोने लगी मैने उसे संभलने को कहा और उसके माथे पर एक किस किया हम थोड़ी देर ऐसे ही बेठे रहे फिर रूपा चाय बना के लाई हम दोनो ने चाय पी मैं फ्रेश होने वॉशरूम में चला गया थोड़ी देर मैं रूपा ने खाना लगा दिया फिर हम दोनो टी.वी देखने लगे अब क्लाइमेंक्स था मुझे जिसका इंतज़ार था मैं बेड रूम मैं जाकर लेट गया रूपा किचन मैं काम कर रही थी मैं आखें बंद करके एक अंतहीन का इंतज़ार करने लगा थोड़ी देर मैं रूपा आई और मेरे को सोता देख कर मेरे बगल मैं लेट गयी.

मै धीरे से उठा मैने आँख खोली अरे रूपा हाँ भैया रूम मैं अंधेरा था लेकिन खिड़की से रोशनी आ रही थी हमारी आखें टकराई उसने सफेद सूती साड़ी पहन रखी थी अंधेरे मैं भी रूपा का बदन जगमगा रहा था उसने धीरे से अपना ब्लाउज आगे से खोला और ब्रा को उपर की तरफ कर दिया और मेरी तरफ देखा हमारी आखें फिर एक बार टकराई वो जैसे कह रही हो आओं भैया चूसो इन्हें ये तुम्हारे आम है मैने धीरे से अपना मुहँ बढ़ाया दूध रिसने की वजह से ब्लाउज और ब्रा पूरे गीले हो चुके थे मैने अपना मुहँ उसकी बड़ी-बड़ी चूचीयों पर लगा दिया और उन्हे चूसने लगा दूध की धार से मैं गले तक गीला हो गया लेकिन इस तरह से थोड़ी परेशानी हो रही थी मै अपने हाथों से उसका ब्लाउज उतरने लगा और फिर ब्रा भी उतार दी अब उसका ऊपर का अंग पूरा नंगा हो गया था.


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11 thoughts on “हाय क्या बूब्स थे रूपा के-2”

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