चूत में लंड डालो-1

Spread the love

[ A+ ] /[ A- ]

Font Size » Large | Small


hindi sex story: हेलो फ्रेंड्स !
मेरा नाम रोहन शर्मा है, मै इंदौर में रहता हूँ। 28 साल का युवक हूँ। जॉब करता हूँ। मेने अब तक ४ औरतों की चुदाई कर चूका हूँ। मेरे लण्ड का आकर ८ इंच है।
आज मै आप को मेरी एक चुदाई की घटना बताना चाहता हूँ की खाना बनाने वाली बाई को कैसे चोदा।
तो सुनो- उसका नाम सुमन है, 33 साल की बड़े-बड़े बूब्स और गांड वाली माल है, पहले दिन ही उसे देख के मेरे अंदर का जानवर जाग गया था। उसका ३६-३०-३८ का फिगर देख के चुदाई के लिए बेताब हो गया, क्योकि मै अकेला रहता हु और मेरी कोई गर्लफ्रेंड भी नही है इसलिए चुदाई के लिए हर टाइम तड़पता रहता हु।

तो मै पहले दिन से ही सुमन को पटाने में लग गया। मेने सोचा थोड़ा रेस्पेक्ट के साथ बात सुरु करनी चाहिए सो मेरे उसे बाई न बुलाते हुए दीदी कह कर संम्बोधित किया और आज क्या खाना बनाना हे उसे बताया।
मै किचन में ही खड़ा रह कर उस से बात करने लगा क्योकि मुझे तो जान-पहचान बढ़ाने की जल्दी थी और हां खाना कैसे बनती वो भी तो देखना था।
मेने उस से पूछा की और कहा-कहा खाना बनती हो? घर में कौन-कौन हे? जैसे कुछ बातें जो सामान्य परिचय के लिए पूछा जाता हे। उसने बताया की वो एक जगह और खाना बनती हे और परिवार में पति, एक बेटा ६ साल है।
मेरे अच्छे से बात करने से वो भी बहुत जल्दी कंफरटेबल हो गई और मुझसे अच्छे से बात करने लगी।
जब वो रोटी बेल रही थी तो मै उसके बड़े-बड़े बूब्स को हिलते हुवे देख रहा था और सोच रहा था की कब ये दबाने को मिलेंगे।

२-३ दिन में ही बाई को समझ में आ गया था की मै बात करने के बहाने उसके बूब्स और गांड को घूरते रहता हूँ। मै भी बातो-बातो में उसके हुस्न की तारीफ़ कर देता था और फ्रेंड्स जैसे की हर औरत को तारीफ पसंद हे, वैसे ही सुमन भी अपनी तारीफ सुन के बहुत खुश हो जाती थी। कभी उसके खाने की भी तारीफ कर देता था, की खाना बहुत स्वादिस्ट बनती हो और दोस्तों वो खाना सच में बहुत अच्छा बनती थी।
करीब ७ दिन हो गए थे उसे मेरे या खाना बनाते हुए और अब उसे भी यकीं हो गया था की मै उसे पटाने की कोशिश कर रहा हु।

अब तो उसके नखरे गर्लफ्रेंड की तरह हो गए थे, मेरा मतलब वैसे तो नहीं पर खाना बनाते टाइम बोला करती थी, की आप सब्जी ताजी नहीं लाते हो, कितना कम खाते हो, रोज खाना बचा देते हो जैसे।
अब हमारे बीच अच्छे से बात होने लगी थी, हँसी-मजाक भी करने लग गए थे।
अब मै उसे छूने के बहाने ढूँढता था। किचन से कुछ लेने के बहाने उसकी गांड को छू लेता था। दिन-प्रतिदिन ये छूना बढ़ता गया और अब तो मै गांड और बूब्स जैसे शब्दोँ का उपयोग करने लगा था की दीदी आप के बूब्स बहुत बड़े-बड़े हे, आपकी गांड बहुत खूबसूरत है। वो बस हँस हँस के मेरी बातो को एन्जॉय करती थी, और कुछ नहीं बोलती थी, बस अपनी नशीली आखो से मुझे देख लिया करती थी। मै उसे गरम करने वाली बाते किया करता था, की दीदी आप के पति की राते तो बहुत रंगीन कटती होगी, आप इतनी खूबसूरत हो की उसकी तो हर रात मज़े में होती होगी। मेरी ऐसी बातो से उसका चेहरा और आँखे चमक उठती थी, पर वो कहती थी, चुप करो किसी गन्दी-गन्दी बाते कर रहे हो, जबकि ऐसी बातो से उसको बहुत मज़ा आ रहा होता हे। मै उसकी गांड और बूब्स को छूने की इजाज़त मागते रहता था की दीदी मुझे भी एक बार आपकी गांड और बूब्स को छूने दो न, वो बोलती थी- की दीदी-दीदी कर रहे हो और मुझे छूने की बात करते हो। मेने कहा तो अब मै आप को दीदी नहीं कहूँगा, तो सुमन जोर से हँसी और बोली की बस छूने के लिए तुम मुझे दीदी नहीं कहोगे ? तो मेने कहा आप कहो तो और भी कुछ कर लूंगा कहते हुए उसके पीछे से जा के उसकी गांड से चीपक गया और उसके बगल से हाथ डाल कर बूब्स को पकड़ लिया और जोर से दबा दिया। मेरे ऐसा करते ही वो आअह्ह्ह्ह करते हुए मुझसे दूर हो गई और कहने लगी ऐसा मत करो, आप मुझसे हसी-मजाक करते हो उतना ही ठीक हे ये सब नहीं करो। उसने ये सब इतने प्यार से कहा की मेरा मन मचल गया, और मै ठीक हे कह कर बेड रूम में आ गया।
पर मेरे लंड को बाई की गांड का एहसास कैसे भुलाता, लौड़ा तो पूरा खड़ा हो गया, मेने हाथ में पकड़ के थोड़ा हिलाया, पर मेरा मन नहीं मान रहा था। मुझे तो आज कैसे भी बाई की चुदाई करना है,

क्योकि बाई की वो मुलायन गांड और बूब्स का एहसास मै नहीं भूल सकता था। मै ये सब सोच ही रहा था की बाई की आवाज आई- भैया में जा रही हूँ।
ओह ये क्या, वो तो जा रही है, मेने कहा रुको और वो क्या कहते हुए पीछे मुड़ी और मेने जल्दी से उसका चहरे को पकड़ के होठों पर किश करने लगा, उसने छुड़ाने हुए बोली मत करो ऐसा मुझे जाने दो, मेने कहा किश तो करने दो और मेने फिर से किश करने लगा, फिर उसने छुड़ाया और नहीं-नहीं करने लगी। अब की बार मेने उसे जोर से पकड़ा और वही दिवार से उसे सटा कर फिर किश करने लगा, फिर वो छुड़ाते हुए मुझसे अलग हुई और एक थप्पड़ मेरे गाल पर मार दिया, और चुप-चाप मुझे देखने लगी और मै उसे देख रहा था..
फिर वो अचानक से आगे बड़ी और मुझे किश करने लगी फिर मै भी टूट पड़ा होठो पर, गर्दन पर, माथे पर, उसके पूरे चैहरे पर किश करने लगा। उसे अपनी बाँहो में भर लिया और उसकी बड़ी गांड दबाने लगा और किश करते जा रहा था,वो भी पूरा-पूरा साथ दे रही थी, उसे अपनी बाहों में उठाया और बिस्तर पर ले आया।
बिस्तर पर लेटा कर मै उसके ऊपर लेट गया और बूब्स दबाते हुए उसके रसीले होठों का रस पान करने लगा।
वो तो आंखे बंद करके किश करने में इतनी मग्न हो गई जैसे जन्म-जन्म की प्यासी हो।


Spread the love

One thought on “चूत में लंड डालो-1”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *