आठवें फ्लोर वाली एक लड़की-1

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Antarvasna: हैल्लो फ्रेंड्स.. आप सभी कैसे हो? में उम्मीद करता हूँ कि आप सभी ठीक ठाक हो और बहुत मजे मस्ती कर रहे हो. दोस्तों तो बात शुरू होती है उस बिल्डिंग से जहाँ पर में रहता हूँ. में उस बिल्डिंग के सातवें फ्लोर पर रहता हूँ और ऊपर के आठवें फ्लोर पर एक लड़की और उसकी दादी जी रहते है और उसके माता पिता नहीं है और इसी साल से उसने कॉलेज जाना शुरू कर दिया है.

उसका नाम स्नेहा है उसकी उम्र कोई 20-21 साल के करीब होगी और वो बहुत सेक्सी दिखती है और उसका फिगर किसी ब्लू फिल्म की हीरोईन से कम नहीं है.. लेकिन रास्ते पर दिखता हर माल अपना नहीं हो सकता और हम एक ही बिल्डिंग में रहते थे. फिर कल को कोई लफड़ा हो तो वो भी सही नहीं होता इसलिए में उस पर ज़्यादा ध्यान नहीं देता था.

फिर सारी बातें कुछ दिनों पहले बदल गयी और मुझे किसी काम से छत पर जाना था और मैंने उसे और एक लल्लू जैसे लड़के के साथ एक दूसरे को किस करते हुए देख लिया और में वहाँ से चुपचाप निकल गया.. क्योंकि यह उसकी अपनी लाईफ थी.. लेकिन वो चोंक गयी और वो लड़का भी मुझे देखकर भाग गया. तो मुझे बहुत हंसी आई कि किस बेवकूफ़, डरपोक को मज़े दे रही थी. फिर 5 मिनट बाद वो मेरे फ्लेट पर आई और उसने डोर बेल बजाई.. तो मैंने उसे अंदर आने दिया.

वो मुझसे बोली कि प्लीज किसी को बताना मत. तो मैंने कहा कि ठीक है.. तुम्हे जो करना हो वो करो.. लेकिन तुम किस बेवकूफ़ के साथ मज़े ले रही हो.. वो तुम्हारी मर्ज़ी.. मुझे उससे क्या मतलब तुम जानो तुम्हारा काम जाने.

स्नेहा : वो कोई बेवकूफ़ नहीं टॉपर है.

में : तो क्या वो इसलिए भाग गया?

और में हंस पड़ा.. लेकिन उस टाईम वो खामोश होकर चली गयी. दोस्तों एक बात तो तय थी कि वो बहुत खुले स्वभाव की थी और फिर दो दिन बाद मैंने देखा कि वो किसी और बच्चे के साथ किस्सिंग कर रही थी और में उससे बहुत दूर था.. लेकिन हम दोनों ने एक दूसरे को देख लिया और फिर से मेरी हंसी रुक नहीं पाई. तो वो तुरंत ही मेरे फ्लेट पर आई और बोली कि तुम्हे मुझे देखकर हंसी क्यों आने लगती है?

में : ठीक है में अब तुम्हारा कभी भी मजाक नहीं उड़ाउगा.. लेकिन तुम चाहती क्या हो?

स्नेहा : मतलब क्या है तुम्हारा?

में : तुम दो दिन पहले किसी के साथ थी और आज किसी और बच्चे को ले आई हो तो तुम क्या चाहती हो? दो मिनट तो वो कुछ नहीं बोली और फिर उसने कहा.

स्नेहा : में किसी के साथ सेक्स करना चाहती हूँ.. लेकिन डरती हूँ कि कोई मेरी बेइज़्ज़ती ना कर दे?

में : लेकिन कोई ऐसा क्यों करेगा?

स्नेहा : मैंने 6 महीने पहले एक लड़के को सिर्फ़ गाल पर किस करने दिया था.. तो उसने मेरी पूरे स्कूल में खिंचाई करवाई थी.

में : ओह.. तो इसलिए तुम ऐसे डरपोक बच्चो के साथ ट्राई करती हो?

स्नेहा : तो तुम ही बताओ में क्या करूं?

में : क्या स्नेहा.. तुम्हारे सामने में नहीं खड़ा हूँ?

स्नेहा : अच्छा तो तुम मुझे पर चान्स मार रहे हो?

में : तो क्या तुम अभी ऊपर चान्स खराब नहीं कर रही थी? और वैसे भी में बहुत अनुभवी हूँ.

स्नेहा : लेकिन में नहीं.. किसिंग तक तो ठीक है.. लेकिन बाकी काम में मुझे बहुत डर लगता है.

में : तब तो तुम ऐसे ही बच्चो के साथ खेलो.. असली खेल नहीं होगा तुमसे.

तो वो फिर से नाराज़ होकर चली गयी.. दोस्तों यह लडकियाँ भी सीधे मुहं पर बात कह दो तो इन्हें बहुत जल्दी बुरा लग जाता है. फिर इस बात को 4 दिन के आस-पास हो चुके थे और फिर एक रात को दो बजे किसी ने डोर बेल बजाई.. तो मैंने सोचा कि अभी इतनी रात को कौन होगा? और मैंने देखा तो स्नेहा दरवाजे पर खड़ी थी.

में : ओह.. अब क्या हुआ?

स्नेहा : मुझे आज अभी इसी वक्त पूरा खेल खेलना ही है.. क्योंकि आज दादी बाहर है.

में : क्या कौन सा खेल?

तो इतना कहते ही वो बच्चो की तरह मुझसे लिपट गयी और किस करने लगी. मुझे तो लाटरी लग गई और वो भी अचानक से.. फिर मैंने उसे अंदर लिया और पूछा कि क्या तुम्हे अपनी आप पर पूरा यकीन है? और क्या तुम खेल सकती हो?


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11 thoughts on “आठवें फ्लोर वाली एक लड़की-1”

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